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दर्दनाक! रात 12:30 बजे कांग्रेस नेता के घर में नरसंहार जैसा हमला, एक बेटे की मौत, दूसरा अस्पताल में जूझ रहा

 Published : Apr 24, 2026 02:01 pm IST,  Updated : Apr 24, 2026 02:01 pm IST

सीमेंट और रेत का कारोबार करने वाले सम्मेलाल कश्यप कांग्रेस की ब्लॉक इकाई के पूर्व उपाध्यक्ष हैं। हमलावरों ने उनके दोनों बेटों पर गोलियां चलाईं, जिसमें 19 साल के आयुष की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, दूसरे बेटे आशुतोष के हाथ में गोली लगी है।

प्रतीकात्मक तस्वीर- India TV Hindi
प्रतीकात्मक तस्वीर Image Source : PEXELS

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में तीन अज्ञात हमलावर एक स्थानीय कांग्रेस नेता के घर में घुस गए और गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें उनके एक बेटे की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया। पुलिस ने बताया कि यह घटना बिर्रा पुलिस थाना क्षेत्र के करही गांव में गुरुवार देर रात करीब 12:30 बजे हुई।

19 साल के आयुष की मौत, 16 वर्षीय आशुतोष अस्पताल में भर्ती

जांजगीर-चांपा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कश्यप ने बताया कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक, तीन नकाबपोश हमलावर बाइक पर आए और सम्मेलाल कश्यप के घर में घुस गए। सीमेंट और रेत का कारोबार करने वाले कश्यप कांग्रेस की ब्लॉक इकाई के पूर्व उपाध्यक्ष हैं। हमलावरों ने सम्मेलाल कश्यप के दोनों बेटों पर गोलियां चलाईं, जिसमें 19 वर्षीय आयुष कश्यप की मौके पर ही मौत हो गई। उसके सीने में दो गोलियां लगी थीं। वहीं उसका छोटा भाई 16 वर्षीय आशुतोष घायल हो गया। आशुतोष के हाथ में गोली लगी है। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

हमले का मकसद क्या?

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस दल मौके पर पहुंचा। हमलावरों को पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया गया है, और पूरे इलाके में जांच चौकियां बनाई गई हैं। आस-पास के जिलों और स्थानीय पुलिस थानों को भी सतर्क कर दिया गया है। फोरेंसिक और साइबर टीमों को भी जांच में शामिल किया गया है, और आस-पास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। हमले का मकसद अभी साफ नहीं है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।

घायल आशुतोष ने सुनाई आपबीती

हमले में घायल आशुतोष ने बताया कि वह रात करीब 10 बजे खाना खाने के बाद सो गया था, जबकि उसका बड़ा भाई आधी रात के आसपास जांजगीर से घर लौटा था। उसने बताया, "रात करीब 12:34 बजे, कुछ शोर सुनकर मेरी मां ने मुझे फोन किया। जब मैं जागा, तो मैंने कमरे में तीन हथियारबंद लोगों को देखा, जिन्होंने मुझ पर गोलियां चला दीं। मेरे हाथ में गोली लगी। उसके बाद उन्होंने मेरे भाई पर गोली चलाई। जब मेरी बहन ने मेरे भाई की मदद करने की कोशिश की, तब हमलावरों ने हम पर बंदूक तान दी और पैसे और मोबाइल फोन की मांग की। मेरे पास जो भी नकद था- लगभग 50-60 रुपये और मेरी बहन का फोन, मैंने उन्हें दे दिया।''

कमरों को बाहर से बंद कर भागे हमलावर

उन्होंने बताया कि हमलावर भागने से पहले कमरों को बाहर से बंद कर गए थे। आशुतोष ने बताया कि बाद में मैंने अपने चचेरे भाइयों को बुलाया, जो आए और दरवाजा खोला। उन्होंने लूटपाट को इस हमले का मकसद होने पर संदेह जताया और कहा कि हमलावरों ने केवल थोड़ी सी ही नकदी ली थी। 

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